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अब समय पर खाद आपूर्ति सुनिश्चित करेगी उत्तर प्रदेश सरकार, कृषि मंत्री और रेल मंत्री के बीच हुई बातचीत

अब समय पर खाद आपूर्ति सुनिश्चित करेगी उत्तर प्रदेश सरकार, कृषि मंत्री और रेल मंत्री के बीच हुई बातचीत

किसानों के लिए खाद एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है, जिसके बिना आज के आधुनिक युग में खेती कर पाना बहुत हद तक संभव नहीं है। इतने महत्वपूर्ण घटक होने के बावजूद कई बार देखा गया है, कि किसानों को खाद समय से नहीं मिल पाती। जिसके कारण किसानों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए अब उत्तर प्रदेश की सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध करवाने के लिए कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है, कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है, कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद मिले। ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े, साथ ही किसानों को खाद की कमी से किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।

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किसानों को मिलेगा आसानी से खाद-बीज, रेट में भारी गिरावट इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बातचीत की है। जिसमें उन्होंने ट्रेन के माध्यम से खाद की ढुलाई का मुद्दा उठाया है। साथ ही खाद की ढुलाई में हो रही देरी की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को बताया है, कि वर्तमान में डीएपी और यूरिया खाद की ढुलाई में बंदरगाह से स्टेशन तक खाद की बोरियों को पहुंचाने में 8 से 10 दिन का समय लग जाता है। साथ ही कई स्टेशन ऐसे हैं, जहां प्रशासन ने खाद की ढुलाई को प्रतिबंधित कर दिया है। जिसके कारण खाद की ढुलाई में अनावश्यक समय लगता है। इस वजह से किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाती और किसानों को बुवाई करते समय परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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किसानों को भरपूर डीएपी, यूरिया और एसएसपी खाद देने जा रही है ये सरकार इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खाद की ढुलाई में लगने वाले समय को कम करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल अपनी तरफ से भरपूर कोशिश करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में खाद को उपलब्ध करवाने में कम से कम समय लगे। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि मुख्य व्यवसाय है। यहां 140 लाख हेक्टेयर जमीन में रबी की फसल बुवाई होती है। इसके साथ ही 26 लाख हेक्टेयर जमीन में गन्ने की फसल ली जाती है। फसलों को बिना खाद के उपजाना आसान नहीं है। इसलिए राज्य में खाद की भारी मांग रहती है। इसलिए रेलवे को चाहिए कि उत्तर प्रदेश में खाद की सप्लाई समय पर सुनिश्चित करे, जिससे किसान आसानी से बुवाई कर पाएं।

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अब किसानों को नहीं झेलनी पड़ेगी यूरिया की किल्लत उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस साल रबी की फसल के समय खाद की आपूर्ति बहुत ही धीमी गति से हो रही है। जिसके कारण रबी की फसल की बुवाई प्रभावित हो रही है। उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने जानकारी दी कि भारत के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों जैसे- कीनाडा, कृष्णापटनम, गंगावरम, विशाखापत्तनम और पारादीप में खाद के स्टॉक रखे हुए हैं। वहां से रेक उपलब्ध न हो पाने के कारण खाद की जल्द से जल्द आपूर्ति करने में देरी हो रही है। इन बंदरगाहों में 149,800 मिलियन टन खाद वितरण के लिए रखी गई थी। जिसमें से नवंबर तक मात्र 82,143 मिलियन टन खाद की आपूर्ति की जा सकी है। शेष खाद की आपूर्ति जल्द से जल्द पूरी करवाने की कोशिश की जा रही है। सूर्य प्रताप शाही ने केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मांग की है, कि दैनिक आधार पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को खाद के 10-12 रैक उपलब्ध कराएं जाएं। फिलहाल राज्य को प्रतिदिन 3 से 4 रेक ही उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उस खाद को सहकारी समितियों के माध्यम से जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। रेल मंत्री ने कहा है, कि अभी फिलहाल 25 से 30 रेक रास्ते में हैं जो जल्द ही अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएंगे। खाद की मुख्य आपूर्तिकर्ता संस्था इफको(IFFCO) लगातार उत्तर प्रदेश के किसानों की मांग को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
नैनो डीएपी के व्यवसायिक प्रयोग को मंजूरी, जल्द मिलेगा लाभ

नैनो डीएपी के व्यवसायिक प्रयोग को मंजूरी, जल्द मिलेगा लाभ

खेती में उर्वरकों का इस्तेमाल बेहद बढ़ चुका है. जिस कम करने के लिए नैनो फर्टिलाइजर्स बनाये जा रहे हैं. कुछ समय पहले ही सरकार की तरफ से नैनो यूरिया को मंजूरी दी गयी थी. लेकिन अब इफको के नैनो डीएपी फर्टिलाइजर को अब कमर्शियल रिलीज के लिए मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले से डीएपी फर्टिलाइजर किसानों को ना सिर्फ कम कीमत में मिलेगा बल्कि हम मात्रा में फसल की पैदावार भी ज्यादा होगी. अब तक डीएपी की 50 किलो उर्वरक की बोरी की कीमत करब 4 हजार रुपये थी, जो सरकारी सब्सिडी लगने के बाद 13 सौ 50 रुएये में दी जा रही थी.  लेकिन सरकार के फैसले के बाद 50 किलो की बोरी को एक 5 सौ एमएल की बोतल में नैनो डीएपी लिक्विड फर्टिलाइजर के रूप में दिया जाएगी. इसकी कीमत सिर्फ 6 सौ रुपये होगी. हालांकि इस पूरे मामले में अभी सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे व्यवसायिक इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है. जिस वजह से खेती और किसानी लागत को कम करने में काफी मदद मिलेगी. इसके अलावा जो सब्सिडी सरकार की ओर से भुगतान की जाएगी, उसमें भी काफी कमी आएगी.

सरकार को सब्सिडी बचाने में मिलेगी मदद

किसानों के लिए कीमतों में इस्तेमाल में काफी सुविधाजंक साबित हो सकता है. जिससे सरकार को अच्छी खासी मात्रा में सब्सिडी बचाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा नैनो डीएपी को लिक्विड यूरिया भी कहा जाता है. जो आमतौर पर यूरिया से एकदम अलग और दानेदार होती है. इसे इफको और कोरोमंडल इंटरनेशन ने मिलकर बनाया है. ये भी देखें: जाने क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर और किन फसलों पर किया जा रहा है ट्रायल?

इन उर्वरकों पर भी ध्यान

नैनो डीएपी के बाद अब सरकार जल्फ़ इफको नैनो पोटाश, नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे उर्वरकों पर भी ध्यान देगी. इतना ही नहीं वो जल्द ही इन उर्वरकों को लॉन्च भी कर सकती है. बता दें इफको ने साल 2021 जून के महीने में पारम्परिक यूरिया के ऑप्शन में नैनो यूरिया को लिक्विड रूप में लॉन्च किया था. इतना ही नहीं नैनो यूरिया का उत्पादन बढे, इसके लिए मैनुफेक्चरिंग प्लांट भी बनाए गये थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई देशों में नैनो यूरिया के सैम्पल भेज दिए हैं, जहां ब्राजील ने इफको नैनो यूरिया लिक्विड फर्टिलाइज को पास करके मंजूरी दे दी है.

होगी सरकार की बचत

खेती और किसानी में उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. जिसका असर मिट्टी की उर्वरता पर पड़ रहा है. इस तरह की समस्या से नैनो उर्वरक निपटने में मदद करेंगे. इससे उर्वरकों के आयात पर निर्भरता भी कम हो जाएगी और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी नहीं पड़ेगा. नैनो यूरिया के इस्तेमाल की बात की जाए तो इसके फायदों के बारे में खुद उर्वरक मंत्री ने भी बताया था. उनके अनुसार किसानों को वाजिब दामों में उर्वरकों की उपलब्धता करवाई जाएगी. वहीं इफको द्वारा बनाया गया प्रोडक्ट सरकारी सब्सिडी के बिना भी कई गुना सस्ता है. इससे किसानों को बड़ी बचत होने का अनुमान लगाया जा रहा है.
नैनो यूरिया उर्वरक क्या है और यह किस तरह से काम करता है ?

नैनो यूरिया उर्वरक क्या है और यह किस तरह से काम करता है ?

नैनो यूरिया, जिसे नैनोस्केल यूरिया या नैनोटेक्नोलॉजी-आधारित यूरिया के रूप में भी जाना जाता है, यूरिया उर्वरक का एक अभिनव रूप है जिसने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। 

इसमें पारंपरिक यूरिया (दानेदार यूरिया ) की संरचना और गुणों को संशोधित करने के लिए नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप यूरिया की कुशलता में वृद्धि हुई है, 

liquid नैनो यूरिया के इस्तेमाल से पारंपरिक यूरिया का पर्यावरण पर बुरा प्रभाव कम होगा है और फसल उत्पादकता में सुधार हुआ है। हमारे इस लेख में आप liquid नैनो यूरिया के गुणों और इसके इस्तेमाल से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी के बारे में जानेंगे। 

नैनो यूरिया क्या है?

नैनो यूरिया, यूरिया का ही liquid रूप है , यूरिया एक रासायनिक नाइट्रोजन fertilizer है जिसका रंग सफ़ेद होता है, यह कृत्रिम रूप से पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करता है जो पोधो के लिए एक प्रमुख पोषक तत्व है, 

नैनो यूरिया की 500 ml की बोतल में 40,000 मिलीग्राम प्रति लीटर  nitrogen होती है , नैनो यूरिया की प्रभावशीलता 85 - 90 % तक हो सकती  है जिससे की पौधे को nitrogen की उपलब्ध्ता आसानी से हो जाती है ,

नैनो यूरिया को सीधे पौधे की पत्तियों  पर छिड़का जाता है जिसे पौधे द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है ,नैनो यूरिया को  IFFCO – Nano Biotechnology Research Center कलोल गुजरात द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। 

नैनो यूरिया से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड ने अगस्त 2021 में देश का पहला लिक्विड नैनो यूरिया संयंत्र चालू किया था।  
  • लिक्विड नैनो यूरिया का सीधा फसलों की पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है , जिससे की पौधे द्वारा आसानी से सोख लिया जाता है। 
  • नैनो यूरिया की शेल्फ लाइफ एक साल होती है। 
  • यह किसानों के लिए सस्ता है और किसानों की आय बढ़ाने में भी लाभकारी है। 
  • IFFCO कंपनी के अनुसार नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव, यूरिया की एक बोरी के बराबर होती है , मतलब की 500 ml नैनो यूरिया की बोतल 45 किलोग्राम दानेदार यूरिया के बराबर है।     

नैनो यूरिया से होने वाले लाभ

नैनो यूरिया पौधों की जड़ों द्वारा बेहतर संपर्क और अवशोषण को बढ़ावा देता है। इससे पौधे की पोषक तत्व ग्रहण क्षमता में सुधार होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि फसलों द्वारा अधिक नाइट्रोजन का उपयोग किया जाता है और बर्बादी कम होती है।

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नैनो यूरिया  फसलों को नाइट्रोजन की निरंतर आपूर्ति प्रदान करता है, जिसके परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि और उपज में सुधार होता है। 

नैनो यूरिया के नियंत्रित उपयोग और बढ़े हुए पोषक तत्व अवशोषण से पर्यावरण में नाइट्रोजन के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। 

नैनो यूरिया के इस्तेमाल से जल प्रदूषण कम होता है क्योंकि दानेदार यूरिया पानी के साथ भूमि के निचे चला जाता है जिससे की भूमिगत जल प्रदूषण होता है नैनो यूरिया के इस्तेमाल से नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है, 

जो जलवायु परिवर्तन में एक शक्तिशाली योगदानकर्ता है।   नैनो यूरिया के इस्तेमाल से किसानों को उच्च फसल उपज प्राप्त होती है। 

इससे न केवल लागत बचती है बल्कि यूरिया की कुल मांग भी कम हो जाती है, जिससे अधिक टिकाऊ कृषि पद्धतियों में योगदान मिलता है।  

पारंपरिक यूरिया (दानेदार यूरिया) में क्या कमियाँ है   

यूरिया दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में से एक है। यह पौधों को आवश्यक पोषक तत्व नाइट्रोजन प्रदान करता है, जो पौधों की वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। हालाँकि, पारंपरिक यूरिया में कुछ कमियाँ हैं जिन्हें नैनो यूरिया का इस्तेमाल करके दूर किया जा सकता है। 

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जब पारंपरिक यूरिया को मिट्टी में डाला जाता है, तो यह विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं से गुजरती है जिससे वाष्पीकरण, निक्षालन और विनाइट्रीकरण के माध्यम से नुकसान होता है। 

ये नुकसान न केवल उर्वरक की प्रभावशीलता को कम करते हैं बल्कि वायु और जल प्रदूषण जैसे पर्यावरण प्रदूषण में भी योगदान करते हैं। 

दानेदार यूरिया फसलों के लिए 30 -40 % ही प्रभावी है जबकि नैनो यूरिया फसलों के लिए 85 - 90 प्रतिशत तक प्रभावी है।   संक्षेप में, नैनो यूरिया कृषि उर्वरकों के क्षेत्र में एक आशाजनक प्रगति की किरण है।

इसके नैनोस्केल गुण बेहतर पोषक तत्व ग्रहण, नियंत्रित रिलीज, कम पर्यावरणीय प्रभाव और कुशल संसाधन उपयोग प्रदान करते हैं। 

जैसे-जैसे इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास जारी है, नैनो यूरिया में टिकाऊ कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है, जो उर्वरक उपयोग को कम करते हुए फसल उत्पादकता में वृद्धि में योगदान देता है।

नैनो DAP किसान भाइयों के लिए अब 600 रुपए में उपलब्ध, जानें यह कैसे तैयार होता है

नैनो DAP किसान भाइयों के लिए अब 600 रुपए में उपलब्ध, जानें यह कैसे तैयार होता है

कृषकों के लिए एक खुशखबरी है। दरअसल, अब से भारत के समस्त किसानों को इफको की Nano DAP कम भाव पर मिलेगी। किसानों को अपनी फसलों से बेहतरीन पैदावार पाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यों को करना होता है। उन्हीं में से एक खाद व उर्वरक देने का भी कार्य शम्मिलित है। फसलों के लिए डीएपी (DAP) खाद काफी ज्यादा लाभकारी माना जाता है। भारतीय बाजार में किसानों के बजट के अनुरूप ही DAP खाद मौजूद होती है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि दुनिया का पहला नैनो डीएपी तरल उर्वरक गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया। केंद्रीय आवास और सहकारिता मंत्री ने नई दिल्ली में इफको (IFFCO) के मुख्यालय में इफको के नैनो डीएपी तरल (Nano Liquid DAP) उर्वरकों को राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया। एफसीओ के अंतर्गत इंगित इफको नैनो डीएपी तरल शीघ्र ही किसानों के लिए मौजूद होगा। अगर एक नजरिए से देखें तो यह पौधे के विकास के लिए एक प्रभावी समाधान है। खबरों के अनुसार, यह 'आत्मनिर्भर कृषि' के पारंपरिक डीएपी से सस्ता है। डीएपी का एक बैग 7350 है, जबकि नैनो डीएपी तरल की एक बोतल केवल 600 रुपये में उपलब्ध है।

जानें DAP का उपयोग और इसका उद्देश्य क्या है

यह इस्तेमाल करने के लिए जैविक तौर पर सुरक्षित है और इसका उद्देश्य मिट्टी, जल एवं वायु प्रदूषण को कम करना है। इससे डीएपी आयात पर कमी आएगी। साथ ही, रसद और गोदामों से घर की लागत में काफी गिरावट देखने को मिलेगी। बतादें, कि तरल उर्वरक दुनिया के पहले नैनो डीएपी (Nano DAP), इफको द्वारा जारी किया गया था। नैनो डीएपी उर्वरक का उत्पादन गुजरात के कलोल, कांडा एवं ओडिशा के पारादीप में पहले ही चालू हो चुका है। इस साल नैनो डीएपी तरल की 5 करोड़ बोतलों का उत्पादन करने का लक्ष्य है, जो सामान्य डीएपी के 25 लाख टन के बराबर है। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह उत्पादन 18 करोड़ होने की आशा है। ये भी पढ़े: दिन दूना रात चौगुना उत्पादन, किसानों को नैनो तकनीक से मिल रहा फायदा

नैनो DAP तरल नाइट्रोजन का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है

नैनो डीएपी तरल नाइट्रोजन का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। साथ ही, यह फास्फोरस व पौधों में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी को दूर करने में सहायता करता है। नैनो डी-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) तरल भारतीय किसानों द्वारा विकसित एक उर्वरक है। उर्वरक नियंत्रण आदेश के मुताबिक, भारत की सर्वोच्च उर्वरक सहकारी समिति (इफको) को 2 मार्च, 2023 को अधिसूचित किया गया था। साथ ही, भारत में नैनो डीएपी तरल का उत्पादन करने के लिए इफको को एक राजपत्र अधिसूचना जारी की गई थी। यह जैविक तौर पर सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है। अपशिष्ट मुक्त साग की खेती के लिए उपयुक्त है। इससे भारत उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर तीव्रता से निर्भर रहेगा। नैनो डीएपी उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा व जीवन दोनों को भी बढ़ाएगा। किसान की आमदनी और भूमि के संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान होगा। ये भी पढ़े: ‘एक देश में एक फर्टिलाइजर’ लागू करने जा रही केंद्र सरकार

नैनो DAP कैसे निर्मित हुई है

नैनो DAP के मामले में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने बताया है, कि "नैनो डीएपी को तरल पदार्थों के साथ निर्मित किया गया है। किसान समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के लिए पीएम मोदी का विजन किसानों की आमदनी बढ़ाने एवं उन्हें बेहतर करने के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रहा है। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यू एस अवस्थी ने बताया है, कि नैनो डीएपी तरल पदार्थ फसलों के पोषण गुणों एवं उत्पादकता को बढ़ाने में काफी प्रभावी पाए गए हैं। इसका पर्यावरण पर काफी सकारात्मक असर पड़ता है।
इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर श्री योगेंद्र कुमार को MSCS का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया

इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर श्री योगेंद्र कुमार को MSCS का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर योगेन्द्र कुमार को 17 August को हुए चुनाव में नवगठित-राष्ट्रीय स्तर की बहु राज्य बीज सहकारी समिति के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना गया है। योगेंद्र कुमार को साकेत स्थित इफको के मुख्यालय में आयोजित बीज सहकारी समिति की पहली वार्षिक आम सभा के दौरान चुना गया था। कृभको के अध्यक्ष चंद्र पाल सिंह यादव और एनसीडीसी के एमडी पंकज बंसल, योगेन्द्र कुमार के प्रस्तावक और अनुमोदक थे। इस चुनाव के लिए सहायक रजिस्ट्रार श्रीमती सुमन कुमारी को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था। यह भी पढ़ें: इफको (IFFCO) कंपनी द्वारा निर्मित इस जैव उर्वरक से किसान फसल की गुणवत्ता व पैदावार दोनों बढ़ा सकते हैं सहकारी समितियाँ जो महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा हैं, उनमें इफको, कृभको, NAFED और दो सरकारी सहायता प्राप्त निकाय NDDB और NCDC शम्मिलित हैं। बोर्ड के सदस्यों में नेफेड के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह, कृभको के अध्यक्ष चंद्र पाल सिंह, एनडीडीबी के अध्यक्ष और एमडी मीनेश शाह और एनसीडीसी के एमडी पंकज कुमार बंसल शामिल थे। इफको के चेयरमैन दिलीपभाई संघानी ने सोशल मीडिया के माध्यम से योगेंद्र कुमार को बधाई देते हुए लिखा, 'राष्ट्रीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए इफको के विपणन निदेशक योगेंद्र कुमार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।' यह भी पढ़ें: इफको बाजार का एसबीआई योनो कृषि ऐप के साथ समझौता दरअसल, जैसे ही योगेंद्र कुमार के चुनाव की खबर सामने आई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। सहकारी जगत के लोगों ने उन्हें बधाई देने में एक क्षण नहीं गंवाया। इफको के एमडी डॉ. यू.एस.अवस्थी से लेकर उर्वरक कंपनी के अन्य कनिष्ठ और वरिष्ठ कर्मचारियों और अन्य लोगों ने योगेंद्र कुमार को उनकी जीत पर बधाई दी। भूतपूर्व कृभको के महाप्रबंधक वी.के. तोमर बीज सहकारी समिति में अंशकालिक सीईओ के रूप में कार्यरत थे  ऐसा कहा जा रहा है, कि सीईओ की पूर्णकालिक नियुक्ति अतिशीघ्र ही की जाएगी। “हमें बीज सहकारी समिति का सदस्य बनने के लिए 2000 पैक्स से आवेदन प्राप्त हुआ है। इस मुद्दे को अगली बैठक में उठाया जाएगा” तोमर ने भारतीय सहकारिता संवाददाता से कहा। योगेंद्र कुमार के पास सहकारी समितियों में विभिन्न पदों पर कार्य करने का 36 वर्षों से ज्यादा का समृद्ध अनुभव है। उन्होंने चंद्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से कृषि में स्नातक की डिग्री हांसिल की है। यह भी पढ़ें: इफको ने देश भर के किसानों के लिए एनपी उर्वरक की कीमत में कमी की वह अपनी गतिशीलता के लिए काफी जाने जाते हैं, जो उनके काम में भी साफ झलकता है। उन्होंने इफको के सागरिका उत्पाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। अपनी यात्रा के दौरान, कुमार ने नीम के तेल और बहुत सारे बाकी उपयोगी नीम आधारित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने के लक्ष्य से नीम के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज (एमएससीएस) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत बीज सहकारी समिति जो कि गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और वितरण के लिए एक शीर्ष संगठन के रूप में कार्य करेगी। साथ ही, रणनीतिक अनुसंधान एवं विकास और स्वदेशी प्राकृतिक बीजों के संरक्षण व संवर्धन के लिए एक प्रणाली विकसित करेगी।
जाने क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर और किन फसलों पर किया जा रहा है ट्रायल?

जाने क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर और किन फसलों पर किया जा रहा है ट्रायल?

आजकल हर तरह की खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए केमिकल और अलग अलग तरह के उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कृषि से बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए उर्वरकों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को कम करने के लिए लंबे समय से उपाय ढूंढे जा रहे हैं और इसके लिए नैनो तकनीक काफी बेहतरीन साबित हो रही है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोओपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) बहुत समय से लिक्विड फॉर्म में उर्वरक बनती रही है और अब उसी ने नैनो यूरिया लॉन्च किया था। जिसे किसानों ने खूब पंसद किया। पहले किसानों को भारी-भारी बोरी उर्वरकों की उठानी पड़ती थी। लेकिन अब ये काम बसह 500 मिली की बोतल का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये उर्वरक लिक्विड फॉर्म में है और इसका छिड़काव बेहद आसानी से पानी के साथ किया जा सकता है। पिछले कुछ सालों में नैनो यूरिया फर्टिलाइजर से कृषि की उत्पादकता बढ़ाने और पर्यावरण की सुरक्षा में काफी मदद मिली है।

 

नैनो डीएपी फर्टिलाइजर का ट्रायल (Trial of Nano DAP Fertilizer)

इस पहल में अब केंद्र सरकार भी हिस्सेदार हो गई है और सरकार की तरफ से नैनो डीएपी लॉन्च करने की घोषणा कर दी है। सरकार ने नैनो पोटाश, नैनो जिंक और नैनो कॉपर उर्वरकों पर भी काम करने की बात कही है। 5 फसलों चना, मटर, मसूर, गेहूं, सरसों पर नैनो डीएपी का ट्रायल कर रहे हैं।

 

क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर? (What is Nano DAP Fertilizer?)

नैनो यूरिया की तरह ही नैनो डीएपी 'डाय-अमोनियम फॉस्फेट (Diammonium Phosphate)' का लिक्विड वर्जन है। अब से पहले ये फ़र्टिलाइज़र सूखे फॉर्म में मिलता था और इसे पाउडर-गोलियों के तौर पर पीले रंग की बोरी में उपलब्ध करवाया जाता है। इस उर्वरक से मिट्टी प्रदूषण के आसार रहते हैं। 

ये भी देखें: किसानों को भरपूर डीएपी, यूरिया और एसएसपी खाद देने जा रही है ये सरकार 

कई बार किसान फसल की आवश्यकता से अधिक डीएपी उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं। जिससे बाद में मिट्टी के उपजाऊपन पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह एक फॉस्फेटिक यानी रसायनिक खाद है, जो पौधों में पोषण और उनके अंदर नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी को पूरा करती है। अगर इसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा की बात की जाए तो इस उर्वरक में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है। इससे पौधों की जड़ों का विकास काफी अच्छी तरह से होता है। यह उर्वरक फसल की उत्पादकता को बढ़ाने में काफी बेहतरीन है और किसानों की परेशानी को कम करता है।

इफको (IFFCO) कंपनी द्वारा निर्मित इस जैव उर्वरक से किसान फसल की गुणवत्ता व पैदावार दोनों बढ़ा सकते हैं

इफको (IFFCO) कंपनी द्वारा निर्मित इस जैव उर्वरक से किसान फसल की गुणवत्ता व पैदावार दोनों बढ़ा सकते हैं

भारत के दक्षिणी-पूर्वी समुद्री तटों में उगने वाले लाल-भूरे रंग के शैवाल भी फसल की गुणवत्ता के साथ पैदावार में बढ़ोत्तरी हेतु भी काफी सहायक साबित होते हैं। इफको (IFFCO) द्वारा इस समुद्री शैवाल के प्रयोग से जैव उर्वरक भी निर्मित किया जाता है। कृषि क्षेत्र को और ज्यादा सुविधाजनक बनाने हेतु केंद्र व राज्य सरकारें एवं वैज्ञानिक निरंतर नवीन प्रयोग करने में प्रयासरत रहते हैं। खेती-किसानी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के साथ मशीनों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इनका उपयोग करने के लिए कृषकों को अधिक खर्च वहन ना करना पड़े। इस वजह से बहुत सारी योजनाएं भी लागू की गयी हैं और आज भी बनाई जा रही हैं। इन समस्त प्रयासों का एकमात्र लक्ष्य फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार में बेहतरीन करना है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए फसलीय पैदावार अच्छी दिलाने में जैविक खाद व उर्वरक स्थायी साधन की भूमिका निभा रहे हैं। जैविक खाद तैयार करना कोई कठिन कार्य नहीं है। किसान अपनी जरूरत के हिसाब से अपने गांव में ही जैविक खाद निर्मित कर सकते हैं। परंतु, मृदा का स्वास्थ्य एवं फसल के समुचित विकास हेतु कुछ पोषक तत्वों की भी आवश्यकता पड़ती है, जिसको उर्वरकों के उपयोग से पूर्ण किया जाता है। वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या यह है, कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा की शक्ति पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए ही जैव उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ाने और उपयोग में लाने की राय दी जाती है। समुद्री शैवाल जैव उर्वरक का अच्छा खासा स्त्रोत माना जाता है। जी हां, भारत में नैनो यूरिया (Nano Urea) एवं नैनो डीएपी (Nano DAP) को लॉन्च करने वाली कंपनी इफको ने समुद्री शैवाल के प्रयोग से बेहतरीन जैव उर्वरक (Bio Fertilizer) निर्मित किया है। जो कि फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार को अच्छा करने में काफी सहायक माना जा रहा है।

इफको (IFFCO) 'सागरिका' को किस तरह से तैयार करता है

देश के दक्षिण-पूर्वी तटों से सटे समुद्र में उत्पन्न होने वाले लाल-भूरे रंग के शैवालों के माध्यम से इफको ने 'सागरिका' उत्पाद निर्मित किया है। इसकी सहायता से पौधों की उन्नति व विकास के साथ-साथ फसलीय उत्पादन की बढ़ोत्तरी में काफी सहायता प्राप्त होती है। इफको वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के मुताबिक, इफको के सागरिका उत्पाद में 28% कार्बोहाइड्रेट, प्राकृतिक हार्मोन, समुद्री शैवाल, प्रोटीन सहित विटामिन जैसे कई सारे पोषक तत्व उपलब्ध हैं। 

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'सागरिका' से क्या क्या लाभ होते हैं

इफको की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समुद्री शैवाल से निर्मित सागरिका का विशेष ध्यान फसल की गुणवत्ता में बेहतरी लाना है। इसकी सहायता से फल एवं फूल का आकार बढ़ाने, प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल का संरक्षण, मृदा की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने एवं पौधों की उन्नति व विकास हेतु आंतरिक क्रियाओं को बढ़ावा देने का कार्य किया जाता है। किसान इसका जरूरत के हिसाब से फल, फूल, सब्जियों, अनाज, दलहन, तिलहन की फसलों पर छिड़काव कर सकते हैं।

सागरिका जैविक खेती हेतु काफी लाभदायक होता है

बहुत सारे किसान वर्षों से रसायनिक कृषि करते आ रहे हैं। इसलिए वह एकदम से ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming)की दिशा में बढ़ने से घबराते हैं। क्योंकि किसानों को फसलीय उत्पादन में घटोत्तरी का काफी भय रहता है। इस प्रकार की स्थिति में इफको सागरिका किसानों के लिए काफी हद तक सहायक भूमिका निभा सकता है। यह एक रसायन रहित उर्वरक व पोषक उत्पाद है, जो कि फसल को बिना नुकसान पहुंचाए उत्पादन को बढ़ाने में कारगर साबित होता है। किसान हर प्रकार की फसल पर इफको सागरिका का दो बार छिड़काव कर सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो 30 दिन के अंतर्गत सागरिका का छिड़काव करने से बेहतर नतीजे देखने को मिलते हैं। यह तकरीबन 500 से 600 रुपये प्रति लीटर के भाव पर विक्रय की जाती है। किसान एक लीटर सागरिका का पानी में मिश्रण कर एक एकड़ फसल पर छिड़काव किया जा सकता है।