किसान भाइयों आप यह तो जानते ही हैं कि मिट्टी अच्छी हो तो फसल अधिक हो सकती है। मिट्टी की कमियों को दूर करके फसल उगायी जायेगी तो अधिक फायदा होगा।
सरकार ने मृदा परीक्षण के लिए सेंटर खोल दिये हैं, उसके लिये किसान भाइयों को अपने जरूरी काम छोड़ कर सरकारी सेंटरों तक आने-जाने की दौड़ भाग करनी होती है।
यदि यही मृदा परीक्षण का काम घर पर आसान तरीकों से हो जाये तो फिर कहना ही क्या? आज हम आपके लिए वो चार आसान तरीके लेकर आये हैं, जिनसे आप घर बैठे अपनी मिट्टी यानी मृदा का परीक्षण कर सकते हैं।
मृदा में पानी को सोखने की क्षमता, अम्लीय या खनिज तत्व की कमी या अधिकता की जानकारी मिल जाने से किसान भाई किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बच सकते हैं। आम तौर पर तीन तरह की मिट्टी होती है। चिकनी मिट्टी, रेतीली मिट्टी या दोमट मिट्टी होती है।
इन मिट्टियों को कैसे पहचानें, पहले चरण में यह है कि आप अपनी मिट्टी गीली नहीं बल्कि नमी वाली मिट्टी हाथ में लें और उसे कसके निचोड़ने की कोशिश करें। जब आप हाथ खोलेंगे तो उसमें तीन तरह के परिणाम सामने आयेंगे उससे पहचान लेगें कि आपकी मिट्टी कौन सी है
दूसरे चरण में आपको मिट्टी की जल निकासी की समस्या का परीक्षण करना बताया जा रहा है। खेती में जल निकासी का परीक्षण करना बहुत ही आवश्यक है। जलभराव से कई तरह के फसलों के पौधों की जड़ें सड़ जाती हैं और फसल नष्ट हो जाती है।
मिट्टी की जलनिकासी का परीक्षण इस तरह से करें:- जो किसान भाई इस तरह का परीक्षण अपने खेत का करना चाहते हों तो उन्हें वहां पर छह इंच लम्बा और छह इंच चौड़ा तथा एक फुट गहरा गड्ढा खोदना चहिये।
इस गड्ढे में पानी भर दें, पहली बार इसका पानी अपने आप निकलने दें। जब एक बार गड्ढे का पानी निकल जाये तो उसमें दोबारा पानी भर दें।
इसके बाद उस गड्ढे पर नजर रखें तथा पानी डालने का टाइम नोट करना चाहिये। फिर उसका पानी निकलने का समय नोट करें।
यदि पानी निकलने में चार घंटे से अधिक समय लगता है तो आपको समझना चाहिये कि आपकी इस मिट्टी में जल निकासी की समस्या है।
यानी जल निकासी की गति काफी धीमी है। इसके बाद उस मिट्टी का उपचार कराना चाहिये। उसके बाद ही कोई फसल बोने की योजना बनानी चाहिये।
अब तीसरे चरण के रूप में हम मिट्टी की उर्वरा शक्ति यानी उसकी जैविक शक्ति का परीक्षण करेंगे। मिट्टी की जैविक शक्ति उसकी उर्वरा शक्ति का परिचय देती है।
इसका परीक्षण करके आप मिट्टी की जैविक गतिविधियों की परख कर सकते हैं। इससे आपको मालूम हो सकता है कि आपकी मिट्टी कितनी उपजाऊ है।
क्योंकि यदि आपकी मिट्टी में केंचुए हैं तो आपको यह समझना चाहिये कि आपकी मिट्टी में अन्य तरह के भी बैक्टीरिया व कीट भी हो सकते हैं।
केंचुए और बैक्टीरिया तो आपकी खेती के लिए लाभकारी होते हैं और यह मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं लेकिन रोगाणु कीट आपकी फसल को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। उनका उपचार आपको पहले से ही करना होगा।
1.जैविक शक्ति का परीक्षण करने के लिए आप यह तय करें कि आपकी मिट्टी कम से कम 55 डिग्री तक गर्म हो गई है। उस स्थिति में मिट्टी में नमी है तब आप मिट्टी में एक फुट लम्बा और एक फुट चौड़ा तथा एक फुट गहरा गड्ढा खोदें। गड्ढे से निकली मिट्टी को किसी कार्ड बोर्ड पर रख लें।
2.इसके बाद आप इस मिट्टी को आप अपने हाथों से छानते हुए उसे गड्ढे में वापस डालने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया को पूरा करते समय आप मिट्टी व गड्ढे पर पैनी नजर रखें।
मिट्टी को छानते वक्त आपके हाथों में केंचुएं टकराते हैं तो आपको उनकी गिनती करते रहना चाहिये। इस दौरान आपको अपनी मिट्टी में यदि 10 केंचुए मिल जाते हैं तो आपको खुश हो जाना चाहिये क्योंकि इस तरह की मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है और खेती के लिए बहुत अच्छी मानी जा सकती है।
3.यदि इससे कम केंचुए आपको मिलते हैं तो आपका यह जान लेना चाहिये कि आपकी मिट्टी की जैविक शक्ति बहुत कम है।
यह मिट्टी स्वस्थ जैविक बैक्टीरिया वाली नहीं है और इसमें जैविक शक्ति वाले जीवाणुओं को पनपने देने की शक्ति नहीं है। इसका अर्थ यह समझना चाहिये कि आपकी मिट्टी में पर्याप्त कार्बन नहीं है और यह मिट्टी अम्लीय या क्षारीय है।
इस तरह की मिट्टी का आवश्यक उपचार कराकर ही उसे फसल योग्य बना सकते हैं। इस तरह के परीक्षण से किसान भाइयों को उर्वरक प्रबंधन में भी काफी मदद मिल सकती है।
किसान भाइयों मिट्टी की अम्ल और क्षार की परख करने के लिए हमें पीएच मान का परीक्षण करना होगा।
मिट्टी के अम्ल या क्षारीय स्तर के आधार पर ही यह कहा जा सकता है कि आपकी मिट्टी कितनी उपजाऊ है और उसमें कौन-कौन सी फसल ली जा सकती है और कौन सी नहीं ली जा सकती है।
कुछ फसलें कम उपजाऊ वाली मिट्टी में भी उगाई जा सकती है जबकि अधिकांश फसलों के लिए सामान्य पीएच मान वाली मिट्टी चाहिये। इसलिये मिट्टी का पीएच मान निकालना बहुत आवश्यक होता है।
इसे दूसरे शब्दों में कहा जाये कि इस पीएच मान पर ही खेती का भाग्य टिका होता है। इसकी जांच के बिना खेती के बारे में फैसला नहीं किया जा सकता है।
किसान भाइयों आपकी मिट्टी के अम्लीय स्तर पर सारा कुछ निर्भर करता है कि आपके खेत में पौधे किस तरह से विकसित हो सकते हैं और कौन सी खेती की जा सकती है।
पीएम मान का परीक्षण शून्य से लेकर 14 तक किया जा सकता है। इसमें पीएम मान्य शून्य बहुत अम्लीय होता है और 14 बहुत क्षारीय होता है।
ये अम्लीय और क्षारीय दोनों एक शब्द नहीं हैं और दोनों के अर्थ अलग-अलग हैं। हम जानते हैं कि अम्लीय और क्षारीय में क्या अंतर होता है।
अम्लीय मिट्टी उसे माना जा सकता है जिसका पीएच मान शून्य से लेकर 5 या 6 तक होता है। इस मिट्टी में हाइड्रोक्साइड आयन की मात्रा कम हो ती है।
यदि इस तरह के घोल के स्वाद की बात करें तो इसका स्वाद खट्टा होता है। पीएच का मान जितना कम होता है, उतनी ही वह मिट्टी अम्लीय अधिक होती है। इस तरह की मिट्टी में जैविक उर्वरा शक्ति नहीं होती है।
क्षारीय मिट्टी वह होती है जिसका पीएच मान 8 से 14 तक होता है। इस तरह की मिट्टी में हाइड्रोक्साइड आयन की मात्रा ज्यादा होती है।
यदि हम इस तरह के घोल की बात करें तो परीक्षण में इसका स्वाद कसैला होता है और इसका लिटमस टेस्ट में रंग नीला होता है।
अधिक क्षारीय मिट्टी में फसल व मिट्टी को स्वस्थ बनाने वाले बैक्टीरिया नहीं होते हैं। अच्छी खेती के लिए पीएम मान 6 से सात के बीच सबसे अच्छा माना जाता है।
मिट्टी का पीएच मान 5 से कम या 8 से अधिक होता है। इस तरह की मिट्टी में फसल अच्छी नहीं हो सकती। किसान भाइयों इसके लिए प्रत्येक उद्यान केन्द्र में पीएच परीक्षण किट आसानी से मिल जाती है।
यह किट काफी अच्छे टेस्टिंग के परिणाम देतीं हैं। इससे आप अपनी मिट्टी के पीएच मान को आसानी से जांच परख सकते हैं।
यदि आपकी मिट्टी का पीच मान 6 से 7 के बीच है तो आपको कोई समस्या नहीं है और इससे कम या अधिक होने पर आपको सहकारी सेवा केन्द्रों या जिला कृषि केन्द्रों से सम्पर्क करना होता।
वो आपकी मिट्टी को परीक्षण के लिए लैब में भेजेंगे और जांच रिपोर्ट में आपको सारी बातें बताई जायेंगी।
जो कमियां होंगी उनके उपचार के बारे में भी बताया जायेगा। इस तरह से आप अपनी मिट्टी का सुधार करके अपनी मनचाही फसल ले सकते हैं।