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फसल

कृषि असेम्बली लाइन: तकनीकी एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

कृषि असेम्बली लाइन: तकनीकी एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

लेखक : डॉ वीरेन्द्र सिंहकृषि क्षेत्र में असेम्बली लाइन की अवधारणा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि यह संपूर्ण कृषि आपूर्ति श्रृंखला की कार्यक्षमता और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार हेनरी फोर्ड ने कार उत्पादन में असेम्बली लाइन की दक्षता को बढ़ाया, उसी प्रकार कृषि उत्पादन में भी व्यवस्थित, चरणबद्ध, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर दक्षता में वृद्धि की जा सकती है।कृषि असेम्बली लाइन की अवधारणाकृषि उत्पादन केवल खेत में बीज बोने और फसल काटने तक सीमित नहीं है। यह एक बहु-स्तरीय प्रणाली है जिसमें भूमि सुधार, पौध पोषण, फसल सुरक्षा, कटाई उपरांत प्रक्रियाएँ,...
बायोबीऑन गोल्ड और Udder-H गोल्ड लिक्विड अपने पशुओं को खिलाए और दूध का बंपर उत्पादन पाए

बायोबीऑन गोल्ड और Udder-H गोल्ड लिक्विड अपने पशुओं को खिलाए और दूध का बंपर उत्पादन पाए

एनीमैक्स फार्मा पशु स्वास्थ्य देखभाल उद्योग में तेजी से विकसित होने वाली कंपनी है। वर्ष 2007 में, कंपनी ने अपने संचालन की शुरुआत देश के उत्तरी क्षेत्रों में की, जिनमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से शामिल हैं।  पशु चिकित्सा क्षेत्र के पशुपालकों और किसानों ने कंपनी के कई उत्पादों को स्वीकार किया है, जिससे इसे तेजी से पहचान और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। वास्तव में, पशुओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, कंपनी विभिन्न चिकित्सीय क्षेत्रों में पोषण और वृद्धि को बढ़ावा देने वाले उत्पाद लगातार प्रदान कर रही है। इस लेख में...
मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत इस राज्य के पशुपालकों को मिलेगा 50% से 90% तक अनुदान

मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत इस राज्य के पशुपालकों को मिलेगा 50% से 90% तक अनुदान

झारखंड सरकार किसानों के साथ-साथ पशुपालकों की भी आर्थिक सहायता कर रही है। इस उद्देश्य से सरकार कई योजनाओं को लागू कर रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा सके।इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री पशुधन योजना की शुरुआत की है। यह योजना किसानों और पशुपालकों के लिए आर्थिक रूप से एक बड़ा अवसर लेकर आई है। इसके तहत राज्य सरकार द्वारा 50% से 90% तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे पशुपालन को व्यवसायिक रूप से बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आमदनी बढ़ेगी।  मुख्यमंत्री...
अनानास की आधुनिक खेती: अधिक पैदावार के लिए सही तकनीक

अनानास की आधुनिक खेती: अधिक पैदावार के लिए सही तकनीक

अनानास भारत की एक महत्वपूर्ण फल फसल है और मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, त्रिपुरा, बिहार, मणिपुर, मेघालय और नागालैंड में उगाई जाती है। उत्तर-पूर्वी राज्य देश में कुल अनानास उत्पादन का लगभग 45% योगदान देते हैं। इसे एकल फसल के रूप में बड़े पैमाने पर, बागानी फसलों के साथ अंतर्वर्ती फसल के रूप में या विभिन्न पेड़ों के साथ एक कृषि-वनीकरण फसल के रूप में उगाया जा सकता है। त्रिपुरा और असम के बराक घाटी के कई हिस्सों में, अनानास को कटहल के पेड़ों के साथ उगाया जाता है। मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में इसे पहाड़ी ढलानों...
बादाम उत्पादन से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी

बादाम उत्पादन से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी

बादाम दुनिया की प्रमुख और प्राचीनतम मेवा फसलों में से एक है। इसकी गिरी (kernel) में उच्च तेल सामग्री होने के कारण यह अत्यधिक ऊर्जावान होती है। भारत में बादाम का उत्पादन सीमित स्तर पर होता है, हालांकि, इसे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में बादाम के बागान लगभग 7107 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन 6360 मीट्रिक टन होता है। वहीं, जम्मू डिवीजन में इसकी खेती केवल 117 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है, जिससे 5.0 मीट्रिक टन उपज प्राप्त होती है।  जलवायु और मिट्टी  बादाम की खेती के...
बड़ी इलायची की खेती कैसे की जाती हैं ? जानिए सम्पूर्ण जानकारी

बड़ी इलायची की खेती कैसे की जाती हैं ? जानिए सम्पूर्ण जानकारी

बड़ी इलायची, जो कि ज़िंगिबेरेसी (Zingiberaceae) परिवार का सदस्य है, मुख्य नकदी फसल है जो उप-हिमालयी राज्य सिक्किम और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में उगाई जाती है। बड़ी इलायची को मानव जाति द्वारा उपयोग की जाने वाली सबसे पुरानी मसालों में से एक माना जाता है। सिक्किम बड़ी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक है और यह भारतीय और वैश्विक बाजार में सबसे अधिक योगदान देता है। हाल ही में नागालैंड, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी इसकी खेती शुरू की गई है।बड़ी इलायची की खेती के लिए जलवायुबड़ी इलायची एक छायाप्रेमी पौधा (sciophyte) है और इसका प्राकृतिक आवास उप-हिमालयी...
आड़ू का उत्पादन कैसे किया जाता है जानिए यहां

आड़ू का उत्पादन कैसे किया जाता है जानिए यहां

आड़ू (Peach) एक लोकप्रिय फल है जिसकी खेती मुख्य रूप से पर्वतीय और उप-पर्वतीय क्षेत्रों में की जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम प्रूनस पर्सिका (Prunus persica) है और यह रोज़ेसी (Rosaceae) परिवार का सदस्य है। आड़ू अपने स्वादिष्ट फलों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसमें प्रोटीन, शर्करा, खनिज और विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे यह पोषण का उत्तम स्रोत बनता है। आड़ू के ताजे फलों का सेवन किया जाता है, साथ ही यह जैम, स्क्वैश, शरबत और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण में भी प्रयुक्त होता है। किसानों के लिए यह एक लाभदायक फसल हो सकती है, बशर्ते...